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श्री साईं सच्चरित्र संदेश
"तुम्हें अपने शुभ अशुभ कर्मो का फल अवश्य ही भोगना चाहिए I यदि भोग अपूर्ण रह गया तो पुनजन्म धारण करना पड़ेगा, इसलिये मृत्यु से यह श्रेयस्कर है कि कुछ काल तक उन्हें सहन कर पूर्व जन्मों के कर्मों का भोग समाप्त कर सदेव के लिये मुक्त हो जाओ" I
"जो मुझे प्रेम से पुकारता है उसके सन्मुख मै अवलिम्ब प्रगट हो जाता हूँ" |
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Saturday, March 24, 2012
Thursday, January 26, 2012
साई बाबा का अदभुत आशीर्वाद
साई बाबा वास्तव मे कलियुग के भगवान हैं । कोई विश्वास करे न करे लेकिन मेरे लिये तो बाबा भगवान ही हैं । शायद बाबा का मूल मंत्र इसी लिये श्रद्धा और सबुरी है । उन्होने तो अपने भक्तो के कल्याण के लिये ही शायद इस मंत्र से दीक्षित करने की दिशा दी होगी । मेरे साथ भी बाबा ने दो माह के अन्तराल मे ही ऐसा चमत्कार दिखाया की मेरे विश्वास की नीव ही बाबा ने पक्की कर दी । मैं देहरादून मे बाला वाला ग्राम का रहने वाला हू । मैं विन्द्लास फार्मा मे सर्विस करता था । वेतन भी बहुत अच्छा मिलता था । लेकिन मैं देहरादून मे ही घर के पास सर्विस करने से संतुष्ट नही था ,जबकि मुझे मेरे साथ वाले बहुत ही लक्की कहते थे , क्योकी एजुकेशन पूरी करने के बाद घर के पास ही इतने अच्छे वेतन की सर्विस जो मिल गयी थी ।
मैं देहरादून से बाहर जाकर सर्विस करना चाहता था । हमारे घर से दो -तीन किलोमीटर की दूरी पर ग्राम नकरोन्दा-बाला वाला मे गुलर घाटी मार्ग पर शिरडी साई बाबा का मन्दिर है । अक्सर गुरुवार के दिन मैं मन्दिर जाता ही था । एक दिन मेरे मन मे आया की मैं बाबा से ही कही घर से बाहर की सर्विस के लिये मन्नत करलू । एक गुरुवार को मैने बाबा से प्रार्थना की , यदि बाबा आपने मेरी सर्विस देहरादून से बाहर लगवा दी तो मैं आपके मन्दिर मे प्रसाद अर्पण करूँगा ।
इस बीच मुझे चार -पाच स्थानों के बहुत अच्छे जोब् ओफर भी मिल चुके थे । परन्तु मैं तो देहरादून से बाहर ही सर्विस चाह रहा था । मुझे लगा शायद बाबा अपने प्रति श्रद्धा और सबुरी की परीक्षा ले रहे हैं । लेकिन मुझे तो बाबा पर पूर्ण श्रद्धा थी । ठीक उसी समय हिमाचल प्रदेश मे एक फार्मा कम्पनी मे नियुक्ति हेतु विज्ञापन निकला और मैने आवेदन कर दिया । बाबा की कृपा देखिये की मुझे कम्पनी द्वारा साक्षात्कार हेतु बुला लिया गया । बाबा के आशीर्वाद से मैं दो माह के अन्दर ही देहरादून से बाहर हिमाचल प्रदेश मे एक बहुत अच्छी सर्विस पा गया । ऐसा बहुत ही कम देखा गया है जब एक साधारण व्यक्ति इस प्रकार का प्रयास करे और उसकी मेहनत सफल हो जाये । ये तो बाबा ही हैं जो अपने भक्तो की हर मनोकामना को पूर्ण करते हैं । विशेष कर इस मन्दिर मे स्थित गुरु स्थान का तो बहुत ही anokhaa महत्व है जहा बाबा अपने भक्तो की मनोकामना को पूर्ण कर आशीर्वाद देते हैं ।
ऋषि चन्दोला-बाला वाला ,देहरादून
Thursday, January 5, 2012
साई के आशीर्वाद से नौकरी मिली
साई के आशीर्वाद से नौकरी मिली
मेरे साई की कृपा जब भक्तो के उपर होती होगी ,तो कुछ ऐसे ही होती होगी जैसे बाबा ने मेरे साथ की । मैं सविता रावत् देहरादून मे रायपुर की रहने वाली हू । मेरे परिवार मे मेरी मा और दो बडी बहने हैं ।पिताजी सेना मे थे, उनका स्वर्ग वास हो गया था ,मेरी मा ने जैसे-कैसे हम तीनों बहनों को पडाया-लिखाया ।मै एक पब्लिक स्कूल मे जोब् करती थी । क्योंकि घर - परिवार का खर्च चलाने के लिये हम तीन बहनों के अतिरिक्त कोई और सदस्य नही है,तो मेरी चिंता सरकारी नौकरी के लिये बढ गयी ।
मैं चाहती थी की यदि सरकारी जोब् मिल गयी तो हम सबका भरण-पोषण आराम से हो जायेगा । मेरी चिंता को देख कर वही स्कूल मे एक रूचि नाम की सीनिअर मैडम ने बताया की चार-पाच किलोमीटर की दूरी पर एक साई स्थानं नाम से , सिद्ध पीठ साई मन्दिर है, तुम कभी वहा गयी हो, वहा सच्चे मन से की गयी हर प्रार्थना पूरी होती है । उसी समय शिक्षा विभाग मे ऐल.टी.ग्रेड के लिये वैकेन्सी समाचार-पत्र निकली, तो मैने भी बाबा के नाम लेकर फ़ार्म भर दिया ।
एक दिन मैं बाबा से आशीर्वाद लेने के लिये भी अपनी बहन के साथ साई मन्दिर जो की गुलर घाटी मार्ग , नकरोन्दा-बाला वाला मे है, गयी और बाबा से संकल्प किया की यदि मुझे इस परीक्षा मे पास करवा दिया तो बाबा मैं आपके नाम से भण्डारा करुगी ।
इस निमित्त मैने प्रत्येक गुरुवार के उपवास भी रखने शुरु किये, और बाबा के मन्दिर मे निरंतर जाना शुरु रखा | बस बाबा ने अपना आशीर्वाद देना शुरु कर दिया । इस बीच एक कुत्ते ने मुझे काट भी लिया, डाक्टर ने बताया की कुत्ते को देखते रहना की वो मर ना जाये । यदि मर गया तो समझना, कुत्ता पागल था । दो दिन बाद वास्तव मे वह कुत्ता मर गया ।क्योकि मालूम चला की वह पागल था, मैं बहुत घबरायी हुई थी । बाबा का नाम लेती रही, डॉक्टर ने मुझे कुत्ते के इंजेक्शन लगवाये । लेकिन मैं समझती हू ऐसे मामलो मे इंजेक्शन भी कहा काम करते हैं जब पागल कुत्ता काट जाये।
परन्तु मुझे तो बाबा पर पूर्ण विश्वास था । मेरी बाबा ने पूर्ण रक्षा की । मेरी परीक्षा का परिणाम भी घोषित होने वाला था। मेरी मा को परिणाम वाले दिन की पूर्व रात्रि को बाबा ने स्वप्न मे दर्शन देकर कहा की तेरी बेटी पास हो गयी। सुबह मेरी मा ने मुझे बताया कि सविता, रात बाबा ने सफ़ेद् वस्त्रो मे मु झे दर्शन देकर कहा की जा तेरी बेटी पास हो गयी । आज तेरा रिजल्ट तो नही आगया । अब तू जाकर अपना परिणाम देख तो। मैं तो घबरायी हुई थी की मालूम नही कैसा रिजल्ट होगा, मेरी जाने की हिम्मत नही हो रही थी । मेरी बहन कहने लगी चल नेट पर देख लेते हैं ।
जब रिजल्ट देखा तो बाबा के आशीर्वाद से मैं पास हो गयी थी । थोडे ही समय के पश्चात मुझे दिसंबर २०११ मे ज्वाइनिन्ग लेटर भी मिल गया, वो भी गुरुवार के दिन। मैने बाबा से वचन किया था की मेरे पहले वेतन से मैं उद्द्यापन भी करुगी और भण्डारा भी करुगी । आखिर वह दिन ५ जनवरी २०१२ गुरुवार का आ गया जब मैने अपनी बडी दो बहनों तथा मा के साथ साई स्थानं साई मन्दिर जो वास्तव मे सिद्ध पीठ स्थान है ,उद्द्यापन का पूजा-पाठ व हवन इत्यादि कर अपना संकल्प पूरा किया । रुचि मैम के मार्गदर्शन से मुझे बाबा का आशीर्वाद तो मिला ही, पर मेरे जीवन मे बाबा ने इस इस प्रकार का चमत्कार किया तो मेरे पूरे परिवार मे बाबा के प्रति पूर्ण श्रद्धा हो गयी ।
सविता रावत ,शिक्षिका ,रायपुर ,देहरादून ,उत्तराखण्ड्।
Wednesday, November 23, 2011
Friday, November 4, 2011
साई बाबा की कृपा से बेन्क मे नौकरी मिली
२० अक्तूबर २०११ । ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है की जब ईश्वर से कोई सच्चे मन से प्रार्थना करे और उसकी विनती को ईश्वर न सुने । मेरा यह अनुभव गुलर घाटी रोड स्थित साई मन्दिर मे साई बाबा ने मुज्हे सरकारी नौकरी दिला कर कराया । मेरे पापा प्रत्येक गुरुवार को बाबा की आरती हेतु मन्दिर मे जाते है ,समयानुसार मैं भी जाता रहता हू । परन्तु हम अज्ञानी बाबा के पास सिर्फ़ अपने स्वार्थ के लिये ही जाते है । मेरे अनुमान से जो भी भक्त साई मन्दिर जाता है वह बाबा से सांसारिक वस्तुओ की कामना ही करता है । इसी प्रकार यदा -कदा मैं भी गुलर घाटी रोड स्थित साई स्थानं साई मन्दिर जाकर बाबा से अपनी नौकरी की कामना करने लगा ।
उसी समय को-ओपरेटीव बेन्क् मे नौकरी हेतु एक ज्ञापन समाचार पत्र मे देख मेरे मन मे भी विचार आया कि क्यो न मैं भी इस नौकरी के लिये आवेदन करूँ । बस अगले ही दिन बाबा का नाम लेकर मैने भी आवेदन कर दिया और बाबा से मिन्नत कर डाली कि साई यदि मेरी नौकरी लग गयी तो मैं गुरुवार को प्रसाद अर्पित करुँगा ।बाबा ने मेरी पुकार को सुना और मैं सब test मे पास होता चला गया । जिस दिन मेरा काल लेटर आया उस दिन भी साई बाबा का दिन गुरूवार था,बाबा ने शायद यह चमत्कार इस लिये किया उनके प्रति मेरा विश्वास और भी पक्का हो जाये ,मेरी यह नौकरी साई के प्रसाद के रूप मे मिली ।
उसी समय को-ओपरेटीव बेन्क् मे नौकरी हेतु एक ज्ञापन समाचार पत्र मे देख मेरे मन मे भी विचार आया कि क्यो न मैं भी इस नौकरी के लिये आवेदन करूँ । बस अगले ही दिन बाबा का नाम लेकर मैने भी आवेदन कर दिया और बाबा से मिन्नत कर डाली कि साई यदि मेरी नौकरी लग गयी तो मैं गुरुवार को प्रसाद अर्पित करुँगा ।बाबा ने मेरी पुकार को सुना और मैं सब test मे पास होता चला गया । जिस दिन मेरा काल लेटर आया उस दिन भी साई बाबा का दिन गुरूवार था,बाबा ने शायद यह चमत्कार इस लिये किया उनके प्रति मेरा विश्वास और भी पक्का हो जाये ,मेरी यह नौकरी साई के प्रसाद के रूप मे मिली ।
साई सभी भक्तो का इसी प्रकार कल्याण करे ।
अमित तीर्थःवाल् , ग्राम बालावाला ,देहरा दून ,
Thursday, November 3, 2011
साई बाबा के अदभुत चमत्कार से घर मे एक फूल खिला
दिनाक् ३ नवंबेर । बाबा की लीला का जितना भी गुणगान किया जाये उतना ही कम लगता है ।मै सुनील धोण्डियाल् देहरा दून के पास नक्रोन्दा का रहने वाला हू ।दो वर्ष पहले मेरी शादी हो गयी थी,तभी से हम दोनो पति -पत्नी ने घर मे एक बच्चे की आव्श्यक्ता पर विचार किया ।परन्तु एक वर्ष बीतने के पश्चात भी जब् कोई परिणाम नही निकला तो हमने डाक्तर से संपर्क करना शुरु किया ।
सभी ने यह कः दिया की तुम्हारी पत्नी के गर्भाशय की दोनो टयुब बन्द है ,उन्होने बताया की किसी भी महिला की यदि एक भी टयुब् ठीक है तो भी बच्चे की सम्भाव्ना रहती है ,परन्तु आपकी पत्नी की दोनो टयुब् बन्द है, यदि आप दोनो बच्चा चाहते है तो आपकी पत्नी को आपरेशन करवाना पडेगा । हम दोनो इस बात से निराश हो गये । हम आपरेशन नही कर वाना चाहते थे ।इस बात के लिये घर मे भी राय नही बनी । मेरी पत्नी ने हिम्मत नही हारी।
उसको मालूम हुआ घर से दो -तीन किलोमिटेर की दूरी पर साई अस्थानं नाम से साई बाबा का सिद्ध् पीठ मन्दिर है, और भक्तो की मुराद यहा बाबा पूरी करते हैं ।
मेरी पत्नी ने हर गुरु वार् को बाबा के मन्दिर मे जाना शुरु कर दिया और घर मे एक बच्चे की कामना बाबा से की, इस निमित्त मेरी पत्नी बाबा के उप्वास् भी रखने शुरु कर दिये तथा बच्चा होने पर प्रसाद भी कबूल किया । साई बाबा त्रिकाल दर्षि है ,वो अपने भक्तो का कल्याण करने के लिये ही इस कलयूग मे अव्तरित् हुये है । साई ने मेरी पत्नी की पुकार को सुना और साई के आशिर्वाद् से घर के आगन मे एक फूल रुपी कन्या का प्रसाद मिला ।
उसको मालूम हुआ घर से दो -तीन किलोमिटेर की दूरी पर साई अस्थानं नाम से साई बाबा का सिद्ध् पीठ मन्दिर है, और भक्तो की मुराद यहा बाबा पूरी करते हैं ।
मेरी पत्नी ने हर गुरु वार् को बाबा के मन्दिर मे जाना शुरु कर दिया और घर मे एक बच्चे की कामना बाबा से की, इस निमित्त मेरी पत्नी बाबा के उप्वास् भी रखने शुरु कर दिये तथा बच्चा होने पर प्रसाद भी कबूल किया । साई बाबा त्रिकाल दर्षि है ,वो अपने भक्तो का कल्याण करने के लिये ही इस कलयूग मे अव्तरित् हुये है । साई ने मेरी पत्नी की पुकार को सुना और साई के आशिर्वाद् से घर के आगन मे एक फूल रुपी कन्या का प्रसाद मिला ।
जबकि सभी डाकटरो ने मना कर दिया था ।साई बाबा ने उन सबकी भविष्यवानि को फ़ेल् कर दिया । आज ही गुरु वार् को हम सब् अपने परिवार् के साथ् बाबा की आरती मे संम्लित् हुये और बाबा को कबूला हुआ प्रसाद व चादर भी अर्पित की । इस स्थान से बाबा ने श्रद्धा से आने वाले भक्तो की कामनाये पूर्ण की है ।
ॐ साई राम । सुनील धोण्डियाल् ग्राम बालावाला ,नक्रोन्दा रोड ,देहरा दून । Saturday, October 8, 2011
Devotees Experiences - के बी चंद ( पूर्व सुबेदार ,भारतीय थल सेना ) ग्राम बालावाला ,देहरादून ,उत्त्राखण्ड्
बाबा की सेवा करने का फ़ल् प्राप्त हुआ
ॐ साई राम ,आज दिनांक ६ अक्टूबर को विजय दशमी का दिन बाबा की महासमाधि के रूप मे भी मनाया जाता है ,और बाबा के चमत्कार स्वरूप बाबा ने मुज्हे भी आज ही के दिन गुल्लर घाटी रोड स्थित साई मन्दिर मे प्रसाद चढ़ाने का अवसर दिया ।बाबा की लीला को मैं कभी नही भुला सकता ,मेरी उम्र इस समय ७२ वर्ष की है ,मेरा घर साई मन्दिर गुल्लर घाटी रोड पर आमने सामने ही है ,दिन भर मैं बाबा के मन्दिर सेवा मे लगा रहता हुं ।
दिनान्क १४ अगस्त को मेरी नयी गाड़ी इन्दिगो यू ऐ ०७ टी ८६२८ मुज्जफ़्फ़र् नगर से चोरी हो गयी ।मेरा छोटा पुत्र लगातार पाँच दिन तक पुलिस के साथ गाड़ी को तलाश करता रहा ,परन्तु गाड़ी का कोई सुराग नही मिल सका ।
१८ अगस्त गुरूवार के दिन मैं तो मन्दिर मे प्रसाद वितरण मे लगा था , मेरा लड़का घर वापस आ गया । अगले दिन १९ अगस्त को जब प्रातः मैं मन्दिर गया मेरे मुख से निकाल पडा की बाबा मैं आपकी इतनी सेवा करता हू मेरी ही गाड़ी चोरी करानी थी ।
मालूम नही बाबा मेरी परिकचह ले रहे थे ,या अपना चमत्कार दिखाना चाहते थे । मैने उसी समय बाबा से ११००/- रुपये का प्रसाद चढ़ाने की मिन्नत की ।मैने प्रसाद वाली डायरी मे देखा तो मेरा नम्बर आज विजय दशमी के दिन था । मैने अपना नाम लिख दिया ।
अगले दिन 20 अगस्त को मेरे फोन पर मुज्हे मुज्जफ़्फ़र् नगर पुलिस थाने से प्रातः सूचना मिली की आपकी गाड़ी मुज्जफ़्फ़र् नगर -दिल्ली रोड पर लवारिस् खड़ी है ,अपनी गाड़ी की पहचान कर ले जाओ ।
इस प्रकार बाबा ने मेरी सेवा भावना परिणाम दिखा कर गाड़ी तो दिला ही दी साथ ही बाबा के प्रति मेरा विश्वास पक्का हो गया ।मै अपने जीवन भर बाबा के इस चमत्कार को कभी नही भुला सकता । अब इसी विश्वास को और पक्का करने हेतु मैं १० अक्तूबर बाबा के दर्शन करने शिरडी जा रहा हुं ।
बाबा इस प्रकार सबकी सहायता करते हैं जो भक्त उन पर पूर्ण विश्वास करते हैं । शायद बाबा ने अपने भक्तो को इसी लिये श्रद्धा और सबुरी का मूल मंत्र दिया । के बी चंद ( पूर्व सुबेदार ,भारतीय थल सेना ) ग्राम बालावाला ,देहरादून ,उत्त्राखण्ड् ।
बाबा की सेवा करने का फ़ल् प्राप्त हुआ
Saturday, September 17, 2011
Devotees Experiences - हिमांशु भंडारी, तुनवाला, देहरादून ,उत्तराखंड
ॐ साईं राम अंजू जी ,शिर्डी साईं बाबा मंदिर ,गुलर घाटी रोड देहरा दून में प्रत्येक गुरु वार को भक्तो के द्वारा हलुवे का प्रसाद दिया जाता है ,यह सिलसिला पिछले चार -पांच वर्षों से
चल रहा है,एक दिन श्री पेतवालजी ने मुझे कहा की जो भक्त वहां बाबा का प्रसाद दे रहें है उनसे ये भी प्रश्न करो की उनके साथ क्या बाबा का चमत्कार हुआ है,तो कल गुरु वार को जिस भक्त का प्रसाद था मैंने उनसे पूछा उन्होंने जो बताया वो मई आपको मेल कर रहा हूँ ,कृपया साईं सुमीरन में प्रकाशित करने का कष्ट करें ,आगे से मै देहरा दून के बाबा से सम्बन्धित समाचार आपको भेजता रहूँगा, इसके लिए आपके समाचार पत्र के सदस्य भी बनवा दूंगा ,धन्यवाद,
बाबा ने एयर फ़ोर्स में नौकरी दिलाकर उपकार किया
बाबा अपने भक्तो के ऊपर बड़ा उपकार करते हैं ,परन्तु हम अन्ज्ञानी बाबा की माया को समझ ही नहीं पाते ,मेरी मम्मी और मै ,मेरी नौकरी को लेकर परेशान रहते थे,घर में सभी बाबा को मानते हैं,हमारे गाँव तुनवाला से च्रार किलोमीटर की दूरी पर सिद्धपीठ साईं बाबा का बहुत विशाल मंदिर बन रहा है ,जो की साईं स्थानम के नाम से गुलर घाटी रोड ,देहरादून पर है,इसके बारे में किसी भक्त ने मेरी बहन व् मम्मी को बताया कीनिर्माणाधीन साईं मंदिर में गुरु स्थान की स्थापना हो रखीहै और यह बहुत ही सिद्ध स्थान है,जो भी भक्त बाबा से यहाँ पर प्रारथना कर मांगता है बाबा उसकी मुरादें पूरी करते हैं ,यह बात सुनकर मैं एक गुरूवार को बाबा से नौकरी हेतु प्रार्थना करने गया और अगले गुरूवार से बाबा के उपवास करने लगा ,इसी बीच एयर फोर्स की भर्ती के लिए समाचार पत्र में विज्ञापन निकला देख मैंने भी फॉर्म भर दिया, कुछ समय पश्चात् नवम्बर में परीछा हेतु मुझे पत्र मिला, जनवरी २०११ को जब परिणाम आया तो देखा की बाबा ने मेरी प्रार्थना सुनकर मेरा नाम मैरिट में ला दिया ,बस मेरे नौ उपवास भी जनवरी में पूरे हो गए थे ,मैंने उद्द्यापन कर दिया ,१ सितेम्बर२०११ को बाबा ने मेरे विशवास को और भी पक्का कर दिया जब मुझे एयर फोर्स की नौकरी ज्वाइन करने हेतु पत्र मिला,प्रत्येक भक्तों की भांति मैंने भी बाबा के सिद्धपीठ साईं स्थानम मंदिर गुलर घाटी रोड मंदिर में गुरुवार १५ सितम्बर को अपना काबुल किया हुआ प्रसाद बाबा को चढ़ाया ,कुछ भक्तो के अनुभव के अनुसार जिस किसी दम्पति को संतान की इक्छा होती है बाबा ने उनकी भी झोली इस स्थान से अपना आशीर्वाद देकर भरी है,ये बाबा की लीला उन भक्तों को ही देखने को मिलती है जो बाबा के मूल मन्त्र श्रद्धा और सबुरी पर विशवास रखते हैं,
साईं स्थानम मंदिर की वेबसाइट www.saisthanam.com पर भी भक्त लोग मंदिर के बारे में भी सब कुछ देख सकते हैं, हिमांशु भंडारी ,तुनवाला,देहरादून ,उत्तराखंड
Tuesday, August 2, 2011
Devotees Experiences - Devendra Bhatt
ॐ साईं राम
ॐ साईं राम ,बाबा मुझे प्रत्येक वर्स शिर्डी आने का अवसर प्रदान करते हैं ,और यह सिलसिला १९८३ से चल रहा है .इस बार भी बाबा ने मुझे शिर्डी आने का अवसर दिया .हर बार की तरह इस बार भी बाबा ने हमें अपनी करुना और आशीर्वाद का पात्र बनाया .दो माह पूर्व रेल से आरक्छन करने के पश्चात भी सीट कंफ़र्म नहीं हुई.बाबा का नाम लेकर ट्रेन में बैठ गए .मैंने conductor से बात की तो जबाब मिला पहले जिनकी प्रतीक्छा सूचि में सबसे पहला नंबर होगा उनको पहले देना पड़ेगा ,ट्रेन पूरी पैक है उनका भी नंबर कैसे आयेगा.यह सोचकर की बाबा जो भी करेंगे स्वीकार है .
देहली से ट्रेन चल पड़ी .3rd AC में आरक्छन था ,टी टी ने भी हाथ खड़े कर दिए थे ,मेरी पत्नी कुछ अधिक परेशां थी ,परन्तु हमारी श्रधा और विश्वास तो बाबा पर था ,टी टी भी क्या करता ट्रेन ग्वालियर पहुंची तो मैं फिर से टी टी के पास गया ,उसने मुझे देखते ही कह दिया की जिस सीट पर आपके मेम्बेर्स बैठे है वही बैठे रहे ,हमारी चार बर्थ थी चारों पर हम बैठे रहे परन्तु टी टी ने यह कह दिया था की यदि कोई अगले स्टेशन पर कोई आ गया तो आपको खाली करना पड़ेगा ,बाबा के आशीर्वाद से हम शिर्डी पहुँच गए ,कोई नहीं आया . इसी प्रकार से बाबा के एक भजन की याद आ गयी :-
जब कोई नहीं आता ,मेरे बाबा आते हैं
मेरे दुःख के दिनों में वो बड़े काम आते है
मेरे दुःख के दिनों में वो बड़े काम आते है
ॐ साईं राम ( शिर्डी समाधी मंदिर के भी बाबा के अनुभव हैं ,बाबा प्रेरणा देंगे तो लिखूंगा )
Devendra Bhatt
09412054471
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